नगर निगम एफडी घोटाला केस: डीडीओ पावर अफसरों की भूमिका संदिग्ध, पूर्व मैनेजर 5 साल पहले हुआ अंडरग्राउंड; एसीबी की छापेमारी तेज
Municipal Corporation FD Scam Case
अर्थ प्रकाश संवाददाता
पंचकूला। Municipal Corporation FD Scam Case: हरियाणा की एंटी करप्शन ब्रांच की जांच अब कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व मैनेजर और एक एकाउंटेंट की तरफ मुड़ गई है, जो 5 साल पहले नौकरी छोड़ कर गायब हो गए थे। नगर निगम में हुए 160 करोड़ की एफडी गबन के मामले में ईओ विकास कौशिक से दोनों के नाम सामने आने के बाद विजिलेंस बड़े रैकेट का पर्दा फाश करने में जुट गई है। बताया जाता है कि पूर्व मैनेजर ने 2021 में नौकरी छोड़ दी थी और उसके बाद से उसका कोई स्पष्ट पता नहीं है। इसके अलावा पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए विजिलेंस ने नगर निगम से वर्ष 2018 से अब तक डीडीओ पावर रखने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पूरी जानकारी मांगी थी। पड़ताल के दौरान दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। अब तक इस मामले में पूर्व बैंक मैनेजर रजत दहरा, बैंक के वाइस प्रेसिडेंट्स पुष्पिंदर सिंह, ईओ विकास कौशिक समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से पांच को न्यायिक हिरासत में भेजे जा चुके हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक डीडीओ पावर अफसरों की भूमिका की छानवीन हो रही है। निगम प्रशासन ने उन अधिकारियों की डिटेल जांच एजेंसी को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि डीडीओ पावर रखने वाले अधिकारियों के हस्ताक्षर से ही बैंक भुगतान जारी होते हैं, इसलिए अब संदिग्ध अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। इस बीच विजिलेंस की नजर एक पूर्व बैंक मैनेजर पर भी है, जिसकी तलाश जारी है।
नगर परिषद का ईओ को भेज जेल
नगर निगम के करोड़ों रुपये के गबन मामले में हरियाणा स्टेट विजिलेंस ने गिरफ्तार किए पूर्व अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, रिमांड पर चल रहे आरोपी पुष्पिंदर को साथ लेकर विजिलेंस टीम ने सेक्टर-2 स्थित उसके घर पर जांच की। पुष्पिंदर ने 8 अप्रैल को विजिलेंस मुख्यालय में सरेंडर किया था, जिसके बाद अदालत से उसका पांच दिन का रिमांड लिया था। जांच में सामने आया है कि गबन की रकम से लग्जरी गाडिय़ां खरीदी गई हैं, जिन्हें जल्द रिकवर करने की तैयारी है।
घोटाले को ऐसे दिया अंजाम
हालही में गिरफ्तार किए गए कालका नगर परिषद के एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (ईओ) एवं पंचकूला नगर निगम में अकाउंटेंट रह चुके विकास कौशिक ने भी पुष्पिंदर चौधरी के साथ साल 2020 में किए गए घोटाले को अंजाम देने की बात कबूल की थी। जब आरोपी विकास कौशिक नगर निगम में बतौर सैक्शन आफिसर तैनात था तो उसी दौरान आरोपी व कोटक महिंद्रा बैंक के मैनेजर पुष्पिंदर ने मई 2020 में नगर निगम का एक फर्जी बैंक खाता खोला, जिसके बैंक अकाउंट ओपनिंग फार्म पर आरोपी विकास कौशिक ने कमिश्नर नगर निगम व सिनियर अकाउंट आफिसर की मुहरें लगा दी। फिर आरोपियों ने उन मुहरों पर तत्कालिन आयुक्त सुमिधा कटारिया, आई.ए.एस व तत्कालिन सिनियर अकाउंट आफिसर सुशील कुमार के जाली हस्ताक्षर कर दिए।
एफडी की राशि दो फर्जी खातों में गई
आरोपी विकास कौशिक व पुष्पेन्द्र कोटेक महेन्द्रा मैनेजर द्वारा फर्जी डेबिट पत्र (आर.टी.जी.एस/एन.ई.एफ. टी. नोट) से नगर निगम के असल खातों में जो एफ.डी. बनी होती थी, उनको प्री मैच्योर तुड़वाकर उसकी राशि को फर्जी हस्ताक्षर करके नगर निगम निगम के नाम से खोले दो फर्जी खातों में ट्रांसफर करके फिर दोनों खातों से आगे रजत ढाहरा, स्वाति तोमर व अन्य के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। फिर पुष्पिंदर और आरोपी विकास कौशिक उनको आगे बिल्डरों को वह रूपये ट्रांसफर कर देते थे।